ध्यान कहाँ करें

dhyan5

सच्चो सतराम !

ध्यान कहाँ करें वास्तव में ध्यान कहीं पर भी करें, परन्तु एक ही जगह पर करें l

ध्यान !!!

कोशिश करें कि जब हम घर में हों तो फिर एक जगह चुन लें, यदी घर में मंदिर है, तो वहाँ पर ध्यान करें, अगर नहीं है तो अपनी कोई जगह निर्धारित कर लें l

एक जगह पर ध्यान करने का अर्थ यह होता है, कि जैसे हर एक जीव, हर एक मनुष्य का अपना अपना भाग्य है, अपनी अपनी किस्मत होती है, वैसे ही हर एक जगह का भी, अपना अपना भाग्य होता है l

जैसे कभी कोई घर, कोई जायदाद, कोई दुकान हम लेते हैं, खरीदते हैं तो हमारी किस्मत खुलनी शुरू हो जाती है, हमारा भाग्य उदय होना शुरू हो जाता है, और सब कुछ इतना आता जाता है कि हमें पता ही नहीं चलता

और कभी कभी हम कोई घर, कोई जायदाद, कोई जगह लेते हैं, तो कभी कभी, पहले पड़े हुए पाऊँ ही, पीछे हो जाते हैं, वोह इस लिए कियों कि, जैसे हर एक इंसान, हर एक जीव की अपनी अपनी किस्मत, अपना अपना भाग्य होता है, और भाग्य, किस्मत कर्मों की वजह से होते हैं, यदी हमारे करम अच्छे होंगे तो उसके फल स्वरुप हमारा भाग्य उदय होगा, यदी करम गलत करेंगे, तो उसके फल स्वरुप दुःख मिले गा l

तो वैसे ही, हम जब किसी जगह पर, ज़यादा समय , ध्यान, सिमरन, सत्य करम करते हैं, उसी जगह का भाग्य उतना ही खुलता है, और जहाँ पर गलत कार्य होंगे, वह जगह वैसी बन जाये गी l

इसलिए जब अपने घर में एक ही जगह, पर बैठ कर ध्यान, सिमरन करें गे, एक ही जगह पर बैठ कर जाप करें गे, तो जैसे जैसे हमारा अंदर शुद्ध होगा, वैसे वैसे वोह जगह भी उतनी ही शुद्ध होगी, उतनी ही पवित्र होगी, और, जैसे जैसे हम वोह पवित्र स्वास लेंगे, पवित्र सांस लेंगे ,और उन साँसों को छोड़ें गे, वोह शुद्धि, वोह पवित्रताई, वोह शांती, हमारी साँसों में आ कर के, वहाँ के वातावरण, में घुल जाये गी, वहाँ की आबोहवा में घुल जाये गी,

और वहाँ का वातावरण वहाँ का माहोल भी पूरी तरह से शांत, शुद्ध और पुरसुकून हो जाये गा l

जब अपने घर में हम एक ही जगह पर बैठ कर ध्यान करें गे, तो फिर जहाँ पर बैठें गे वोह जगह भी भाग्य से उदय होगी, भाग्यशाली हो जाये गी, और, वहाँ पर बैठ कर जब स्वास लेंगे, वहाँ पर सकून, और शांती फैले गी, तो हमारा घर सकून और शांती का, सुख और समृदी का एक केंद्र बन जायेगा, इसीलिए हर दिन हम एक ही जगह पर बैठें गे, तो उस केंद्र से उत्पन हुए प्रभामंडल का दायरा बढ़ता जायेगा बढ़ता जायेगा और हमारा पूरा घर जो है, वोह सुख समृदी, प्यार और मुहोब्बत, का केंद्र बन जाये गा l

यह न हो कि कभी यहाँ पर कभी वहाँ पर कभी कहाँ पर बैठें…… नहीं ……

जब घर में हों, तो एक जगह पर बैठें, कहीं और जगह हों, तो कहीं पर भी ध्यान में बैठ सकते हैं, और, यदी कभी अवसर मिले, और हम सभी जो घर के हैं, जो परिवार के सदस्य हैं, तो वोह सभी हर दिन मिल कर के, कोशिश कर के साथ में बैठें तो, हम सभी शुद्ध और पवित्र हो जाएँ गे, और अपने घर को भाग्य से भरें लें गे l

और जब हो सके, तो कभी मंदिर में, धाम पर बैठ कर,पूरी मंडली के साथ हम ध्यान करें, जब सभी के साथ बैठें गे, तो सभी की सोच, सभी के शुद्ध विचार, हम सभी को पूरा शुद्ध कर दें गे , और, वहाँ मंदिर का जो भाग्य है रहमतें हैं, उनकी शुद्धि वोह हमारे जीवन में आयेगी, और वोह ले कर के हम अपने घर आयें गे, और अपने घर को भी शुद्ध करें गे पवित्र करें गे

इसीलिए जब हम घर में हों, शहर में हों तो हम अच्छे तरीके से बैठ के ध्यान करें गे, लेकिन कभी कभी काफी ऐसे कारण होते हैं, जैसे कि कभी हम सफ़र में होते हैं, कभी हमारी तबियत सही नहीं होती कभी ऐसा माहोल नहीं मिलता, ऐसे माहोल में होते हैं कि वहाँ पर हम ध्यान कर नहीं पाते हैं, ऐसी स्थिति में हमारी आँखें खुकली हों या बंद हों, हम बैठें हों या सोये हों, हम कुर्सी पर बैठें हों या सोफे पर बैठे हों जैसे हों, उस समय यदी हम किसी मित्र को, किसी साथी, किसी रिश्तेदार को, याद करें तो उसका चेहरा हमारे सामने होता है, ऐसे ही खुली आँखों से हम उसी सच्चे साई को याद करें, अपने सतगुरु को याद करें, और अंदर, जैसे ही हम सांस ले रहे हैं, उसपे नाम का ध्यान और सिमरन करें, हम उभरते रहें गे और बढ़ते रहें गे l

कभी हम सफ़र में हों हम आँखे बंद नहीं कर सकते कयों कि सामन है, किछ और चीज़ें हैं, हमें सभी का ध्यान करना है तो कोई बात नहीं, हम जैसा भी माहोल हो जैसा भी कुछ हो हम वैसा करें लेकिन जब घर में हों तो एक ही जगह पर ध्यान करें l

जब अवसर मिले, तो सब मिलकर, करें , हम मंदिर में, ध्यान करें और, उनकी भी रहमतें ले केर आयें, लेकिन, यदी बाहर हैं,तो आँखें खोल कर, बैठ कर, सो कर के,कैसे भी ध्यान करें ,कोई फर्क नहीं पड़ता, लेकिन हम ध्यान करें ज़रूर, कयों कि यह एक ऐसी चीज़ है, एक ऐसा माहोल है, जो हमें संसार के तो सभी सुख दे, लेकिन आगे साहिब तक भी,मिला दे, लोक और परलोक दोनों संवार दे l

इस लिए, ध्यान को, छोड़ना नहीं है, उस को हर दिन करना अनिवार्य है, और हम करते रहें, और हम प्रभु से प्रार्थना करते रहें गे, वोह रेहमत करे गा,कृपा करे गा, और उनकी आशीष ऐसे ही पाते रहें गे l

और, उसके फल स्वरूप, जो आशीर्वाद मिलेगा, वोह हमें, यहाँ और वहाँ, दोनों जगह, सुख देगा l

सच्चो सतराम l

Translation…

Where we should meditate?

Actually we can meditate anywhere, but we must fix one place for that.
When we are at home, we should fix one place to meditate.
If there is a temple in our house, then we must sit in the temple, otherwise we must fix any other place for meditation in the house.
Since we all know, that every living being has his own luck, similarly, every place also has its own luck.
The purpose of Doing meditation at one place is, that it makes that place pure, pious, divine, auspicious and prosperous.
We will notice that sometimes When we purchase a house , some property, a shop or a plot, it brings good luck to us and we get, a lot of profit, get benefited and sometimes when we buy a new house, shop or property we lag behind and fail to progress.
Good or bad luck depends on the piousness of that particular place.
Good and bad luck of human beings also depends on their good or bad deeds, similarly good or bad luck of a place also depends upon, the type of activities carried out at that place.
It is the principle of cause and effect a place brings good luck or bad luck.
If good deeds like, doing meditation, chanting of beloved God’s name and performing prayers and other good actions are performed at a particular place, they brings good fortune, and good luck to that place and if unethical or bad deeds have been carried out at a particular place then that place becomes ill-fated and brings bad luck .

our innerself becomes pure and pious ,When we regularly sit at one fixed place in our house and do meditation, and chant the pious name of beloved Lord.
Doing this regularly fills us with fullness of our SATGURU/Beloved Lord, and the place of meditation also becomes pious and pure. with chanting of pious name of Beloved Lord with every breath inhaled and exhaled the piousness, purity and peace also blends in the surrounding atmosphere and it becomes pure, pious divine and peaceful.
Even at home when we sit at a fixed place, meditate, inhale and exhale and with every breath chant the pious Name of the Lord, that place becomes the centre of, peace, calmness and prosperity and brings good luck and blessings.
The divine aura emanating from the place of meditation keeps spreading from its center and spreads everywhere in our house and our house becomes the place of bliss, love and prosperity.
We should not keep changing the place of meditation.
When we are at home we must meditate everyday at a fixed place but if we are outside, we can meditate anywhere.
If possible whenever we are at home we must try to sit every day in meditation with the other family members as this brings happiness and prosperity in our house.
Sometimes it is also good to meditate in a temple or at a dham collectively, with all the other devotees because the pure and pious thoughts of everyone together, has a very good impact and benefit all, and also brings purity within us from that part of temple, and we bring it to our house and our house also become pure and unpolluted with the positive aura.
So if we are at home or in the city we must do meditation.
Sometimes when we are travelling, not feeling well or we are at such a place, or in such an atmosphere that we cannot meditate, at time where ever we are, weather we are sitting on a sofa or chair or standing , awake or sleeping, if our eye are open or closed, if we remember our friends, relatives or anybody , their images immediately appear in our eyes.
So at that time instead of remembering others we should remember our Satguru, and with each breath chant the pious name of beloved God within, and while doing this, we will keep progressing and improving.
Sometimes when we are travelling we cannot close our eyes because we have to stay vigilant against theft as we have to look after our luggage, then also with our open eyes, we can remember our Satguru and keep chanting the pious name of beloved Lord but when we are at home we should meditate every day at a fixed place .
Whenever possible we should meditate together.
Meditating in the temple brings the blessings from the temple to our house but if we are outside we still can meditate with our open or closed eyes, but we must meditate because, chanting of the pious name of beloved Lord regularly, gives us comfort here as well as before the Lord almighty.
So meditation is compulsory and we should do it everyday and pray to God for his blessings, protection and grace, which are showered upon us through meditation .

SACHO SATRAM